मैं क्या हूँ और न जाने क्या बन जाना चाहता हूँ
शायद किसी की तलाश हूँ, मंजिल बन जाना चाहता हूँ
या हूँ सेहरा की धुप और बादल बन जाना चाहता हूँ
शायद अजनबी हूँ किसी के लिए, दोस्त बन जाना चाहता हूँ
या हूँ एक ठहरा हुआ दरख़्त और बहती पवन बन जाना चाहता हूँ
शायद कोई भूली हुई कहानी हूँ, हकीकत बन जाना चाहता हूँ
या हूँ अक्स किसी का और अब खुद शख्सियत बन जाना चाहता हूँ
शायद एक कोरा कागज़ हूँ, किसी का पैगाम बन जाना चाहता हूँ
या हूँ बीती हुई रात और एक नयी सहर बन जाना चाहता हूँ
शायद ढेरो अनकही बातें हूँ, जुबान बन जाना चाहता हूँ
या हूँ पैरों की ज़मीन और आसमान बन जाना चाहता हूँ
शायद सिसकती आवाज़ हूँ, ख़ुशी की चहक बन जाना चाहता हूँ
या हूँ टूटा हुआ साज़ और मोसिकी बन जाना चाहता हूँ
शायद कडवी यादों का सबब हूँ, मीठे लम्हों का एहसास बन जाना चाहता हूँ
या हूँ आँखों से टपकता पानी और ओस की बूँद बन जाना चाहता हूँ
मैं क्या हूँ और न जाने क्या बन जाना चाहता हूँ