इस पानी को और न रोको इसे बहने दो जरा
एक नयी सुबह तेरे इंतज़ार में बाहें फैलाये है
इस लम्बी काली रात को अब जाने दो जरा
ख्वाब कभी मरते नहीं, खो जरुर जाते हैं
इन थकी आँखों को उनका पता ढूंढने दो जरा
फूलों को तो हमेशा खिलना है कुछ पल मुरझाकर
इस आबोहवा को खुशबु से फिर महकने दो जरा
किसे छूटना था पीछे, ये किस्मत का फैसला था
अतीत की परछाइयों से मन को निकलने दो जरा
अब नयी मंजिल की ओर जाती एक नयी राह है
वक़्त को तुम्हारी एक नयी दास्तान लिखने दो जरा





