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कब तक यूँ खामोशी का लिबास ओढे रहोगी
बस सुनोगी मुझे तुम, क्या खुद कुछ न कहोगी?
टूटती हैं उम्मीदें जब, दिल में गहरा घाव छोड़ जाती हैं
वक़्त का मरहम लगने दो अब, कब तक इस दर्द को सहोगी?
जिन्दगी एक चंचल नदिया है और यादें एक ठहराव
ये भंवर तुम्हारी मंजिल नहीं, फिर क्यूँ इस पड़ाव पे रुकोगी?
रिश्ते बेर के फल की तरह है, कभी मीठे तो कभी खट्टे
एक कड़वे अनुभव को याद कर, दोस्त बनाने से कब तक डरोगी?
ग़म के चाँद लम्हों के लिए, अपने आंसुओं को यूँ जाया न करो
खुशियों के कई लम्हे अभी बाकी हैं, तब क्या रोते हुए न हंसोगी?
5 comments:
nicely written man............
it's just a start keep writing
:)
Here mine
yaar its really good , both felling wise n technically, i really liked it a lot keep it up and i will b waiting to read more from u
nice yaar.....keep it up.......
mast likha
@ Above all 4 ppl including tarun, girish and honey....
thanx a lot guys
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