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Sunday, March 27, 2011

वक़्त भी यारो कभी करवट बदलता तो होगा

पतझर में भी कहीं फूल खिलता तो होगा 
सेहरा में भी कोई दरख़्त मिलता तो होगा

जिंदगी की राह पर खुद को अकेला न समझ 
तेरा साया तो हर कदम तेरे साथ चलता होगा 

तूफ़ान में चाहे सारा शहर अँधेरे में गुम हो जाए
किसी घर के कोने में एक दिया तो जलता होगा 

आज हम बिछड़े हैं, कल शायद फिर मिल जाएँ
वक़्त भी यारो कभी करवट बदलता तो होगा

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