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Thursday, December 30, 2010

जिंदगी से पहचान अभी बाकी है

इरादों की मजबूत नींव रखी है यहाँ, खवाबो के मकान अभी बाकी है
जो छूट गया पीछे वो मुकद्दर था, हौसलों से आजमाइश अभी बाकी है

२ कदम चलना भी क्या चलना है, गगन में ऊँची उड़ान अभी बाकी है
आँखों से बहते आंसू थम गए तो क्या, चेहरे की मुस्कान अभी बाकी है

चंद फूलों को तुम बगिया ना कहो, इस दर पर बसंत का आना अभी बाकी है
ये रात तो बस ख़तम होने को है, सूर्य की रश्मियों को झिलमिलाना अभी बाकी है

जो टूट कर बिखरे वो कांच के रिश्ते थे, उस हमकदम से मुलाकात अभी बाकी है
ग़म के ये २ पल भूल जाने के लिए है, जश्न की हर हसीं रात अभी बाकी है

कल को याद कर आज भूलना फिजूल है, इस सफ़र में मक़ाम अभी बाकी है
जो गुजरा वो बस एक तजुर्बा भर था, जिंदगी से पहचान अभी बाकी है

1 comments:

GK MADE EASY said...

bhokaal bhai...maja aa gaya..kaafi time baad positive likha hain kch tune keep it up

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